लघुकथा-लालच बुरी बला है-साक्षी कुमारी
लघुकथा-लालच बुरी बला है:साक्षी कुमारी

मेहनत का फल

लघुकथा-मेहनत का फल-साक्षी कुमारी

सोनपुरा नाम का एक गांव था उस गांव में एक गरीब किसान रहता था जिसका नाम सोहन सिंह था उसके पास एक बैल और एक कुत्ते के सिवा कुछ नहीं था वह कुत्ता बराबर फरार था सोहन सिंह ने खेती करके एक गाय खरीदी और उसने मेहनत की उसके पास कुछ पैसे आ गए तो उसने गांव वालों की सलाह से शादी कर ले उसके दो भाई थे यह उनका साथ नहीं देते थे और उससे कहते हम अमीर गरीब से बात नहीं करने करते पर सोन सिंह उनकी बातों का बुरा नहीं मानता था वह अपनी पत्नी से बहुत प्रेम करता था उसकी पत्नी का नाम सविता था वह भी अपने पति इसकी बहुत सेवा करती थी कुछ दिनों बाद उसके एक लड़की हुई उसने उसका नाम संजू रखा वह बहुत सुंदर थी धीरे-धीरे दिन बीत गए कुछ सालों बाद उसकी दो लड़की और हुई वह बहुत खुश हुआ उसने उन दोनों का नाम जो और अंजू रखा हुआ है तीनों आपस में मिलकर रहते थे कुछ भी काम होता था एक साथ करती पानी भरते जनजाति तो एक साथ जाती थी वह सब बहुत खुश थे वह यह देखकर उसके भाई बहुत जलने लगे और कहते कि यह तो बड़ा खुश और पैसे वाला है और मुंह कर चले मुंह कर चले जाते थे वह बहुत आलसी थे वह कुछ भी कामना करते और घर पर बैठकर रोटिया तोड़ते रहते थे धीरे-धीरे उन्होंने सारा पैसा यूं ही खर्च कर दिए अब तो पर आ गए घर भी ना रहा और पैसे भी वह वह खाते रह गए अब तो रोटी भी सड़क पर और सहना भी सड़क पर सोना भी सड़क पर वह बहुत दुखी हो गए और सोन सिंह तो बहुत कुछ था उसने बड़े धूमधाम से दो लड़कियों की शादी कर दी और एक लड़की और पत्नी के साथ बहुत खुशी थाl

 शिक्षा :– मेहनत का फल मीठा होता है मेहनत से हम कुछ भी कर सकते हैं

साक्षी कुमारी

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