कविता -एथेंस, सुकरात और मैं-प्रतीक झा 'ओप्पी' कविताएँ एथेंस, सुकरात और मैं जब सुना मैंने एथेंस का नाम उस पावन माटी को जाना जहाँ सुकरात ने जन्म लिया जहाँ प्रकट हुआ सत्य का आलोक By साहित्य सार May 5, 2025May 5, 2025