हैं अरमान यहीं कुछ कर पाऊँ
मैं अपना नाम अमर कर जाऊँ
खुद की खुद से पहचान बनाकर,
मैं अपना एक इतिहास बनाऊँ
असत्य की मार्ग को त्याग करूँ मैं,
सत्य की मार्ग पर कदम बढ़ाऊँ
खुद की खुद से पहचान बनाकर,
मैं अपना एक मिशाल बनाऊँ
सुख में भले ही दूर रहूँ मैं,
दुख में सबकी हाथ बढ़ाऊँ
मोह-माया को त्याग करूँ मैं,
दर्द- मंदों को मैं गले लगाऊँ
सत्य की सबको मार्ग दिखाऊँ
असत्य की मार्ग से सबकों बचाऊँ
खुद की खुद से पहचान बनाकर,
माँ-बाप और प्रकृति की मान बढ़ाऊँ
हैं अरमान यहीं कुछ कर पाऊँ
मैं अपना नाम अमर कर जाऊँ,
खुद की खुद से पहचान बनाकर,
मैं इतिहास में अपना नाम रचाऊँ।
*लेखक*
रवि कुमार रंजन
बेलसंड सीतामढ़ी बिहार
